Paigham-e-Mohabbat
जहाँ प्यार की भाषा बोली जाती है, जहाँ हर धर्म का सम्मान होता है, वही मेरा प्यारा हिंदुस्तान होता है।
आज़ादी की लौ को कभी बुझने न देंगे, देश की रक्षा में कोई कसर न छोड़ेंगे, चाहे जान चली जाए इस देश के लिए, पर तिरंगे की शान को कभी झुकने न देंगे।
जिस देश में जन्म लिया, उसी देश के काम आऊं, मैं चाहता हूँ कि मैं भारत माँ का लाल कहलाऊं।
देशभक्ति वो जज्बा है जो कभी मरता नहीं, ये वो आग है जो कभी बुझती नहीं, भारत माँ के वीर सपूतों की शहादत, इतिहास के पन्नों से कभी मिटती नहीं।
हमारे देश का झंडा इसलिए नहीं फहराता कि हवा चल रही है, ये इसलिए फहराता है क्योंकि इसे फहराने के लिए सैनिकों ने अपनी आखिरी सांस दी है।
वो जिंदगी ही क्या जो देश के काम ना आए, और वो मौत ही क्या जो तिरंगे में लिपट कर ना आए।
न हिन्दू बन कर देखो, न मुसलमान बन कर देखो, अगर देखना है तो इस देश को एक इंसान बन कर देखो।
देश की मिट्टी का कण-कण हमें पुकार रहा है, भारत माँ का आँचल हमें दुलार रहा है, उठो नौजवानों देश के लिए कुछ कर गुज़रो, इतिहास तुम्हारा इंतज़ार कर रहा है।
जब आँख खुले तो धरती हिन्दुस्तान की हो, जब आँख बंद हो तो यादें हिन्दुस्तान की हों, हम मर भी जाएं तो कोई गम नहीं लेकिन, मरते वक्त मिट्टी हिन्दुस्तान की हो।
भगत सिंह जैसा जज्बा, आज़ाद जैसा फौलाद चाहिए, अगर बदलना है इस देश को, तो फिर से वो इंकलाब चाहिए।
जो देश के लिए शहीद हुए, उनको मेरा सलाम है, अपने खून से जिसने ज़मीन को सींचा, उन वीरों को सलाम है।
तपते रेगिस्तान में, बर्फीली वादियों में, वो हर पल जागते हैं, ताकि हम चैन से सो सकें। भारतीय सेना को सलाम!
कुछ तो बात है मेरे देश की मिट्टी में साहेब, सरहदें कूद के आते हैं यहाँ दफ़न होने के लिए।
कांटों में भी फूल खिलाएं, इस धरती को स्वर्ग बनाएं, आओ, सब को गले लगाएं, हम स्वतंत्रता का पर्व मनाएं।
लहराएगा तिरंगा अब सारे आस्मां पर, भारत का नाम होगा सबकी जुबान पर, ले लेंगे उसकी जान या दे देंगे अपनी जान, कोई जो उठाएगा आँख हमारे हिंदुस्तान पर।
अगर भारत को समझना है तो विवेकानंद को पढ़ो! वहाँ तुम्हें भारत का दिल धड़कता हुआ मिलेगा।
मुकम्मल है इबादत और मैं वतन ईमान रखता हूँ, वतन के शान की खातिर हथेली पे जान रखता हूँ, क्यूँ पढ़ते हो मेरी आँखों में नक्शा पाकिस्तान का, मुस्लिम हूँ मैं सच्चा, दिल में हिंदुस्तान रखता हूँ।
दाग गुलामी का धोया है जान लुटा कर, दीप जलाये हैं कितने दीप बुझा कर, मिली है जब ये आज़ादी तो फिर इस आज़ादी को, रखना होगा हर दुश्मन से आज बचा कर।
सीने में ज़ुनून और आँखों में देशभक्ति की चमक रखता हूँ, दुश्मन की सांसें थम जाएँ, आवाज़ में इतनी धमक रखता हूँ।
ये पेड़ ये पत्ते ये शाखें भी परेशान हो जाएं, अगर परिंदे भी हिन्दू और मुसलमान हो जाएं। हमारा देश एक है और हम सब भारतीय हैं!
मैं इसका हनुमान हूँ, ये देश मेरा राम है, छाती चीर के देख लो, अन्दर बैठा हिन्दुस्तान है।
सुंदर है जग में सबसे, नाम भी न्यारा है, जहाँ जाती-भाषा से बढ़कर, देश-प्रेम की धारा है, निर्मल, पावन, प्रेम पुराना, वो भारत देश हमारा है।
तैरना है तो समंदर में तैरो, नदियों और नहरों में क्या रखा है, प्यार करना है तो देश से करो, इन बेवफ़ा लोगों में क्या रखा है।
जिस दिन रास्ते पर तिरंगा बेचने वाले बच्चे न दिखें, उस दिन समझना हम आज़ाद हो गए हैं।
हम तो किसी दूसरे की धरती पर नज़र भी नहीं डालते, लेकिन इतने नालायक बच्चे भी नहीं जने हैं भारत माँ ने, कि कोई उसकी धरती माँ पर नज़र डाले और हम चुप रहें।
ज़माने भर में मिलते हैं आशिक कई, मगर वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता, नोटों में भी लिपट कर, सोने में सिमटकर मरे हैं कई, मगर तिरंगे से खूबसूरत कोई कफ़न नहीं होता।
वतन हमारा ऐसा कोई ना छोड़ पाये, रिश्ता हमारा ऐसा कोई न तोड़ पाये, दिल एक है जान एक है हमारी, हिन्दुस्तान हमारा है हम इसकी शान हैं।
मेरे मुल्क की हिफाज़त ही मेरा फ़र्ज है, और मेरा मुल्क ही मेरी जान है, इस पर कुर्बान है मेरा सब कुछ, नहीं इससे बढ़कर मुझको अपनी जान है।
चड़ गये जो हंसकर सूली, खाई जिन्होने सीने पर गोली, हम उनको प्रणाम करते हैं, जो मिट गये देश पर, हम उनको सलाम करते हैं।
मैं भारत बरस का हरदम अमित सम्मान करता हूँ, यहाँ की चांदनी मिट्टी का ही गुणगान करता हूँ, मुझे चिंता नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की, तिरंगा हो कफ़न मेरा, बस यही अरमान रखता हूँ।
इतनी सी बात हवाओं को बताये रखना, रौशनी होगी चिरागों को जलाये रखना, लहू देकर जिसकी हिफाज़त की हमने, ऐसे तिरंगे को हमेशा दिल में बसाये रखना।
न पूछो ज़माने को, कि क्या हमारी कहानी है, हमारी पहचान तो सिर्फ ये है कि हम हिंदुस्तानी हैं।
आओ झुक कर सलाम करें उनको, जिनके हिस्से में ये मुकाम आता है, खुशनसीब होता है वो खून, जो देश के काम आता है।
खून से खेलेंगे होली, अगर वतन मुश्किल में है, सरफरोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है।
मुझे ना तन चाहिए, ना धन चाहिए, बस अमन से भरा यह वतन चाहिए, जब तक जिन्दा रहूँ, इस मातृ-भूमि के लिए, और जब मरुँ तो तिरंगा कफन चाहिए।
देशभक्तों के बलिदान से स्वतंत्र हुए हैं हम, कोई पूछे कौन हो, तो गर्व से कहेंगे भारतीय हैं हम।
ना जियो धर्म के नाम पर, ना मरो धर्म के नाम पर, इंसानियत ही है धर्म वतन का, बस जियो वतन के नाम पर।
लिख रहा हूँ मैं अजांम जिसका कल आगाज आयेगा, मेरे लहू का हर एक कतरा इंकलाब लायेगा, मैं रहूँ या ना रहूँ पर ये वादा है तुमसे मेरा कि, मेरे बाद वतन पर मरने वालों का सैलाब आयेगा।
आज़ादी की कभी शाम नहीं होने देंगे, शहीदों की कुर्बानी बदनाम नहीं होने देंगे, बची हो जो एक बूंद भी गरम लहू की, तब तक भारत माता का आँचल नीलाम नहीं होने देंगे।
दे सलामी इस तिरंगे को, जिससे तेरी शान है, सर हमेशा ऊँचा रखना इसका, जब तक दिल में जान है।
कुछ नशा तिरंगे की आन का है, कुछ नशा मातृभूमि की शान का है, हम लहराएंगे हर जगह ये तिरंगा, नशा ये हिंदुस्तान की शान का है।
लहू वतन के काम आए, इससे बड़ा कोई मुकाम नहीं, शहीदों के इस पावन खून का, कोई दूसरा नाम नहीं।
आन देश की, शान देश की, देश की हम संतान हैं, तीन रंगों से रंगा तिरंगा, यही हमारी पहचान है।
चढ़ गए जो हंसकर सूली पर, उन वीरों की शहादत याद करें, जो खून बहा था सरहद पर, उस भारत मां की माटी को नमन करें।