Paigham-e-Mohabbat
बुझी शमा भी जल सकती है, तूफानों से कश्ती निकल सकती है। हो के मायूस यूँ ना अपने इरादे बदल, तेरी किस्मत कभी भी बदल सकती है।
जीत की खातिर बस जुनून चाहिए, जिसमें उबाल हो ऐसा खून चाहिए। ये आसमान भी आएगा जमीन पर, बस इरादों में जीत की गूंज चाहिए।
बिना संघर्ष के कोई महान नहीं होता, बिना कुछ किए जय जयकार नहीं होता। जब तक नहीं पड़ती हथौड़े की चोट, तब तक कोई पत्थर भी भगवान नहीं होता।