Paigham-e-Mohabbat
दोष नहीं है इसमें किस्मत का मेरे दोस्त, तू मिला तो जिंदगी जन्नत बन गई, सच्ची दोस्ती का मिला जो ये तोहफा, रब से मांगी हर दुआ कुबूल हो गई।
दोस्त हो तो तुम्हारी तरह भाई जैसा, जिसके पास होने से मिट जाए तन्हाई जैसा, लाख मुश्किलें आएं जिंदगी की राहों में, पर तू खड़ा रहता है हमेशा परछाई जैसा।