Paigham-e-Mohabbat
जिम्मेदारियों के बोझ तले दबकर भी मुस्कुराते हैं, पिता अपनी हर तकलीफ को आसानी से छुपा जाते हैं।
पिता के साए में डर का नामोनिशान नहीं होता, क्योंकि उनसे बड़ा इस दुनिया में कोई महान नहीं होता।
वो छड़ी जो अब उनके हाथों का सहारा बन गई है, याद दिलाती है कि उनकी जवानी हमारी परवरिश में ढल गई है।
पिता की खामोश आँखों में बहुत कुछ छिपा होता है, जिन्हें समझने वाला बेटा बहुत खुशनुमा होता है।
हर किसी के नसीब में यह प्यार कहाँ होता है, सिर पर पिता का हाथ होना सबसे बड़ा वरदान होता है।
अपने पुराने जूतों को जो कभी नहीं बदलते, मगर हमारे लिए हर चीज़ नई ले आते हैं। ऐसे महान होते हैं हमारे पिता, जो खुद की इच्छाओं का गला घोंट कर मुस्कुराते हैं।
उनकी आँखों में आंसू मैंने कभी देखे नहीं, शायद वे अपने गम किसी से कभी कहते नहीं। वे अंदर से टूट जाते होंगे कई बार, मगर बच्चों के सामने कभी बिखरते नहीं।
कभी वो गुस्से में चिल्लाते हैं तो बुरा लगता है, मगर बाद में उनका वही प्यार बहुत समझ आता है। वे चाहते हैं कि हम उनसे भी आगे निकल जाएं, इसीलिए वो हमें हर ठोकर पर संभालना सिखाते हैं।
पिता की वह पुरानी साइकिल और उनका साथ, आज भी याद आता है मुझे उनका वो प्यार भरा हाथ। वो भले ही आज दूर हैं हमसे इस सफर में, मगर उनकी सिखाई बातें हमेशा हैं मेरे साथ।
खुदा से क्या मांगूँ मैं उनके लिए दुआ में, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी लगा दी मुझको बनाने में। बस सलामत रखें उन्हें मेरे ऊपर हमेशा, यही फरियाद रहती है मेरी हर एक इबादत में।
बालों में सफ़ेदी और चेहरे पर झुर्रियां बताती हैं, कि उन्होंने हमारी खातिर कितनी मुश्किलें उठाई हैं। हम कभी समझ ही नहीं पाए उनके त्याग को, वे चुपचाप अपने अरमानों की बलि चढ़ाते आए हैं।
पिता वो दरख्त है जो धूप खुद सहता है, और अपनी छांव हमें बेहिसाब देता है। उसके रहते हुए कभी कोई डर नहीं लगता, क्योंकि हर मुसीबत से वो अकेले ही लड़ता है।
रात की खामोशी में जब सब सो जाते हैं, पिता कल की फिक्र में जागते रह जाते हैं। वे अपनी थकान कभी ज़ाहिर नहीं होने देते, ताकि हमारे सपनों को कोई आंच न आ जाए।
कभी उंगली पकड़कर चलना सिखाया था, तो कभी सही-गलत का फर्क बताया था। पिता की डांट में भी हमारा भविष्य छिपा होता है, उन्होंने ही तो हमें आदमी से इंसान बनाया है।
पिता के कंधों पर बैठकर आसमान देखा था, उन्हीं की बदौलत मैंने यह जहान देखा था। आज जो कुछ भी हूँ मैं इस दुनिया में, उसकी हर एक ईंट में मेरे पिता का पसीना है।
मांगने से पहले ही जो हर ख्वाहिश पूरी कर दे, अपनी हर जरूरत को जो हंसकर पीछे छोड़ दे। वो फरिश्ता और कोई नहीं मेरे पिता हैं, जो हमारी खुशियों के लिए अपना सब कुछ वार दे।
उनकी डांट में भी एक छिपा हुआ प्यार होता है, वो जानते हैं कि इस दुनिया का दस्तूर क्या होता है। वे हमें काबिल बनाने के लिए खुद को घिस देते हैं, पिता से बढ़कर इस जहाँ में न कोई यार होता है।
जिनकी उंगलियों को पकड़कर चलना सीखा था, आज उन्हीं के आशीर्वाद से हर मुकाम को जीता था। पिता का हाथ अगर सिर पर हमेशा रहे, तो दुनिया का हर गम बिल्कुल फीका सा लगता है।
जिंदगी के हर सफर में एक ढाल बनकर खड़े रहते हैं, पिता वो मजबूत दीवार हैं जो हर आंधी से लड़ते हैं। हमें कभी अहसास नहीं होने देते अपनी परेशानियों का, वे खुद अकेले में रोकर हमारे रास्ते साफ करते हैं।
थक कर चूर हो जाते हैं दिनभर मेहनत करके, मगर बच्चों के चेहरे पर हंसी लाते हैं हँसकर के। यही वो शख्स है जो कभी थकता नहीं, पिता का प्यार कभी किसी के आगे झुकता नहीं।
पिता की खामोशियाँ भी बहुत कुछ कहती हैं, उनकी आँखों में हमारी फिक्र हमेशा रहती है। वे बाहर से भले ही सख्त नजर आते हैं, पर अंदर से उनका दिल मोम जैसा पिघलता है।
कड़कती धूप हो या ठंड का पहरा हो, पिता का साया हमेशा हमारे साथ गहरा हो। वो कभी खुलकर अपने दर्द को बयां नहीं करते, बस चुपचाप हमारी हर जिद को पूरा करते हैं।
धूप में खुद जलकर जो हमें छांव देते हैं, वो पिता ही हैं जो अपनी हर खुशी कुर्बान कर देते हैं। कभी उंगली पकड़कर चलना सिखाया था जिन्होंने, आज उनके ही कंधों पर हमारे सारे सपने पलते हैं।