Intzaar
थक चुकी हैं निगाहें इंतज़ार करते-करते,
अब तो आ जाओ कि साँसें भी जवाब देने लगी हैं।
Intzaar
तुम्हारे आने का इंतज़ार अब भी है,
चाहे तुम आओ या ना आओ, ये दिल तुम्हारा ही रहेगा।
Intzaar
इंतज़ार का मज़ा भी तब है,
जब आने वाले को भी तुम्हारी बेकरारी का एहसास हो।
Intzaar
एक तेरी ही आस में बैठे हैं हम,
वरना इंतज़ार तो हमें खुद मौत का भी नहीं।
Intzaar
तुम्हारे बिना ये रातें कितनी लंबी लगती हैं,
इंतज़ार में ही सुबह हो जाती है।
Intzaar
मैं जानता हूँ कि ये इंतज़ार बेमानी है,
पर दिल है कि मानता ही नहीं।
Intzaar
इंतज़ार की भी एक हद होती है,
और तुमने वो हद कब की पार कर दी है।
Intzaar
हर शाम दिल को ये तसल्ली देते हैं,
कि कल शायद तुम आओगे।
Intzaar
तुमने कहा था कि तुम लौट कर आओगे,
हम आज भी उसी जगह तुम्हारा इंतज़ार कर रहे हैं।
Intzaar
इंतज़ार की राहों में मैंने कई ख्वाब सजाए हैं,
शायद किसी दिन तुम आओगे इन ख्वाबों को सच करने।
Intzaar
तुम्हारे बिना हर लम्हा इंतज़ार सा लगता है,
तुम लौट आओ तो मेरी ज़िन्दगी में बहार आ जाए।
Intzaar
अब तो आदत सी हो गई है इंतज़ार करने की,
अब कोई आए या ना आए, फर्क नहीं पड़ता।
Intzaar
तुम्हारे आने की आहट भी अब एक सपना लगती है,
इंतज़ार में ही मेरी सारी उम्र कटनी है।
Intzaar
मुझे तेरे आने का इंतज़ार हमेशा रहेगा,
चाहे ये इंतज़ार मेरी उम्र भर चले।
Intzaar
इंतज़ार भी उसी का होता है जो कभी हमारा था,
वरना गैरों के लिए कौन रातें जगा करता है।
Intzaar
तुम्हारे इंतज़ार में हमने अपनी खुशियाँ भी दांव पर लगा दीं,
पर तुमने तो पलट कर भी नहीं देखा।
Intzaar
इंतज़ार का दर्द कोई उस आशिक से पूछे,
जिसने उम्र गुजार दी बस एक दीदार के लिए।
Intzaar
हर रोज़ एक नई उम्मीद के साथ उठते हैं,
कि शायद आज तेरा कोई पैगाम आएगा।
Intzaar
तुम्हें देखने की चाहत में हम क्या-क्या नहीं करते,
बस एक बार आ जाओ, हम इंतज़ार नहीं करते।
Intzaar
इंतज़ार की घड़ियाँ बहुत लंबी होती हैं,
ख़ासकर तब, जब कोई अपना दूर हो।
Intzaar
शाम ढलते ही शुरू होता है इंतज़ार तेरा,
रात भर जाग कर करते हैं हम दीदार तेरा।
Intzaar
इंतज़ार भी एक अजीब सी बीमारी है,
दिल को पता होता है वो नहीं आएंगे, फिर भी आस बनी रहती है।
Intzaar
तेरी राहों में बिछा दी हैं हमने अपनी आँखें,
अब तो बस एक ही ख्वाहिश है, तुम लौट आओ।
Intzaar
मैं जानता हूँ कि तुम नहीं आओगे,
फिर भी इंतज़ार करना मेरी आदत बन गई है।
Intzaar
तुम क्या जानो इंतज़ार की तड़प,
कभी किसी का रास्ता तक कर तो देखो।
Intzaar
तुम्हारे आने की आस ही तो जीने की वजह है,
वरना इंतज़ार की तकलीफ़ किसे पसंद है।
Intzaar
मेरे इंतज़ार का इम्तिहान और कितना लोगे,
क्या मेरी जान जाने के बाद तुम लौटोगे?
Intzaar
बस एक मुलाक़ात का इंतज़ार है हमें,
वरना मालूम है कि तुम हमारे नहीं हो।
Intzaar
कितनी रातें गुज़ार दी मैंने इंतज़ार में,
अब तो चाँद भी मेरा मज़ाक उड़ाता है।
Intzaar
कभी तुम भी तो आओ मेरी राहों में,
कब तक हम ही इंतज़ार की सजा काटें?
Intzaar
कुछ रोज़ से इंतज़ार का आलम अजीब है,
आँखें बंद करूँ तो तुम, खोलूँ तो सिर्फ इंतज़ार है।
Intzaar
इंतज़ार रहता है हर शाम तेरा,
यादें कटती हैं ले-ले कर नाम तेरा,
मुद्दत से बैठे हैं ये आस पाले,
कि शायद अब आ जाए कोई पैगाम तेरा।
Intzaar
कभी आओ तो सही मेरी आँखों का हाल देखने,
तेरा इंतज़ार करते-करते ये कितनी खामोश हो गई हैं।
Intzaar
रास्ते आज भी तकते हैं तेरी राहें,
इंतज़ार में सूख गई हैं मेरी निगाहें।
Intzaar
तुझे आना हो तो आ जाना, दर खुला है मेरा,
मेरी तो उम्र गुज़रेगी बस इंतज़ार में तेरे।
Intzaar
सजा ये मिली कि आँखों से नींद छीन ली उन्होंने,
जुर्म ये था कि हम उनके इंतज़ार में जागे थे।
Intzaar
मुझे इंतज़ार करना तो आता है,
पर क्या तुम्हें लौट कर आना आता है?
Intzaar
इंतज़ार ए इश्क में क्या बताऊँ क्या हाल है,
दिल में एक उम्मीद और आँखों में सवाल है।
Intzaar
वक्त भी थम सा गया है मेरे इंतज़ार में,
शायद उसे भी तरस आ गया मेरे प्यार में।
Intzaar
हर आहट पर लगता है कि तुम आ गए,
इंतज़ार ने भी हमें क्या-क्या भरम दिखा दिए।
Intzaar
एक अजब सा नशा है तेरे इंतज़ार में,
हम खुद को भूल गए तेरे प्यार में।
Intzaar
वो आएगा एक दिन इसी आस में जीते हैं,
हम तो बस उनके इंतज़ार का ज़हर पीते हैं।
Intzaar
आ भी जाओ कि अब तो इंतज़ार की हद हो गई,
मेरी आँखें भी अब तो रो-रो कर थक गईं।
Intzaar
इंतज़ार तो हम भी करते हैं तुम्हारा,
बस तुम्हें बताने का हक़ नहीं रहा।
Intzaar
हमने तो उम्र गुजार दी तेरे इंतज़ार में,
और तूने एक पल ना लगाया हमें भुलाने में।
Intzaar
इंतज़ार की घड़ियाँ अब खत्म ही नहीं होतीं,
और वो कहते हैं कि हम याद नहीं करते।
Intzaar
नज़रें बिछा के बैठे हैं हम तेरी राह में,
एक उम्र कट गई है तेरी ही चाह में।
Intzaar
बहुत लंबी है ये रात इंतज़ार की,
आ जाओ कि अब हद हो गई है प्यार की।
Intzaar
ये कैसा सरूर है तेरे इंतज़ार का,
कि मेरी आँखें भी अब मेरी नहीं रहीं।
Intzaar
पलकों पर रुक गया है समंदर खुमार का,
कितना अजब नशा है तेरे इंतज़ार का।
Intzaar
इंतजार का दर्द हर कोई नहीं सह पाता,
ये दिल हर किसी से अपनी बात नहीं कह पाता,
कटती हैं रातें बस तारों को गिन-गिन कर,
पर ये कम्बख्त वक्त अपनी जगह से नहीं हिल पाता।
Intzaar
पलकें बिछाए बैठे हैं उनकी राहों में,
न जाने कब वो लौट कर आएंगे,
इस दिल को उम्मीद है आज भी उन पर,
कि वो एक दिन हमारी बाहों में आएंगे।