Paigham-e-Mohabbat
तुम्हारी यादें हमारे आंसुओं में बहकर निकल आती हैं, जब ये तन्हाइयां हमें बहुत ज्यादा सताती हैं।
तुम्हारी यादों में खो जाना अच्छा लगता है, तुम्हें दूर से ही सही, चाहना बहुत अच्छा लगता है।
तुम्हारी यादों का असर कुछ ऐसा हुआ है मुझ पर, कि अब हर शख्स में सिर्फ तुम ही नजर आते हो।
दूरियों के फासले दिलों को और करीब ले आते हैं, जब हम तुम्हें बहुत ज्यादा मिस करने लग जाते हैं।
तुम्हारी एक झलक पाने को तरसती हैं ये आँखें, तुम्हें बहुत मिस करती हैं हमारी ये रातें।
तुम्हारी यादों का सिलसिला कभी खत्म नहीं होता, तुम्हारे बिना हमारा यह दिल कभी खुश नहीं होता।
तुम्हारी जुदाई ने हमें बहुत कुछ सिखा दिया, तुम्हें कितना मिस करते हैं, यह आंसू बता दिया।
तुम्हारी यादों का दीया हम दिल में जलाए रखते हैं, ताकि अंधेरे में भी तुम्हारा रास्ता साफ दिखे।
तुम्हें याद करते-करते आँखें थक जाती हैं, मगर इस दिल की उम्मीदें कभी कम नहीं होती हैं।
दूरियाँ बहुत हैं हमारे और तुम्हारे बीच में, मगर यादें फिर भी कम नहीं होती इस सफर में।
तुम्हारी वो हँसी आज भी आँखों में तैर जाती है, जब तुम्हारी याद अचानक से दिल को छू जाती है।
तुम्हारी यादों की महक आज भी इस कमरे में है, लगता है तुम आसपास ही हो इसी भ्रम में हैं।
तुम्हें मिस न करें ऐसा कोई लम्हा नहीं होता, तुम्हारी यादों के बिना यह दिल कभी सोता नहीं होता।
तुम्हें खोने का डर और तुम्हें पाने की चाहत, बस यही दो चीजें हैं जो करती हैं हमसे बगावत।
तुम सामने नहीं हो तो क्या हुआ मेरे हमसफर, तुम्हारी यादें ही काफी हैं हमारे जीने के लिए हर पल।
तुम्हें याद करना हमारी सुबह और शाम बन गई है, तुम्हारी हर एक बात हमारे जीने का पैगाम बन गई है।
तुम्हारी यादों का समंदर दिल में उमड़ आता है, जब कोई तुम्हारा नाम प्यार से ले जाता है।
तेरी यादों के सहारे ही हम जी रहे हैं इस दुनिया में, वरना इस तन्हाई में कब के बिखर चुके होते हम।
तेरी यादों की खुशबू इन हवाओं में बिखर जाती है, जब भी तू दूर होती है, यह रात और लंबी हो जाती है।
तुम्हें मिस करते-करते दिन से रात हो जाती है, हमारी हर साँस में बस तुम्हारी ही बात होती है।
तुम्हारी जुदाई का दर्द अब सहा नहीं जाता, तुम्हारे बिना एक पल भी जिया नहीं जाता। लोट आओ अब जल्दी से हमारी इस जिंदगी में, तुम्हारे बिना यह सफर अब तय किया नहीं जाता।
रात के सन्नाटे में एक आवाज़ आती है, वो तुम्हारी याद है जो हमें बहुत रुलाती है। हम खुद को कितना भी समझा लें ऐ मेरे यार, मगर यह दिल सिर्फ और सिर्फ तुम्हें ही चाहता है।
तुम्हारी यादों का मौसम जब-जब छा जाता है, यह सूखा हुआ दिल फिर से हरा हो जाता है। हम लाख छुपाना चाहें इस बेताबी को जमाने से, मगर हमारी आँखें सब कुछ बयां कर जाती हैं।
खिड़की के पास बैठकर जब आसमान को देखते हैं, तुम्हारी तस्वीर इन बादलों में ढूंढते हैं। तुम दूर हो बहुत हमसे इस ज़माने की भीड़ में, मगर इस दिल के सबसे करीब सिर्फ तुम्हें ही पाते हैं।
तुम्हें याद करना अब हमारी आदत बन गई है, तुम्हारी हर बात हमारे दिल की राहत बन गई है। न जाने कब होगी हमारी तुमसे मुलाकात फिर से, बस यही उम्मीद हमारी चाहत बन गई है।
शाम ढलते ही तुम्हारी यादों का पहरा लग जाता है, यह अकेला दिल फिर से तुम्हें ढूंढने निकल जाता है। तुम पास नहीं हो तो क्या हुआ मेरी जान, तुम्हारी यादों के सहारे ही हमारा हर दिन कट जाता है।
तुम्हारी यादें हमारे दिल में इस तरह बस गई हैं, जैसे प्यासे को पानी की बूंद मिल गई हो। हम तुम्हें कितना याद करते हैं क्या बताएं तुम्हें, बस हर धड़कन में सिर्फ तुम्हारी ही गूँज सुनाई देती है।
आसमान के तारों में ढूंढते हैं चेहरा तुम्हारा, कोई तो बता दे कहाँ है ठिकाना हमारा। तुम्हारे बिना यह जिंदगी बिल्कुल वीरान लगती है, बस हर वक्त रहता है इंतजार तुम्हारा।
दिन तो किसी तरह दोस्तों में कट जाता है, मगर रात का हर पहरा बहुत रुला जाता है। तुम्हारी कमी इस दिल को हर पल महसूस होती है, जब भी तुम्हारी याद आती है, यह दिल तड़प जाता है।
तुम्हारी यादों का सिलसिला थमने नहीं देते, इस दिल को किसी और की तरफ मुड़ने नहीं देते। तुम दूर हो हमसे तो क्या हुआ मेरे हमसफर, तुम्हारी यादों को हम कभी खुद से जुदा होने नहीं देते।